Diaries

VIPS ANTHEM

चलो उठो जागो रुकना नही है
पाने को पूरी दुनिया पड़ी है
कदम हमने रखा पहले यहाँ है
VIPS है सीढ़ी छूना आसमान है

मकसद है एक राह अलग है
मीर है कल के छूना फ़लक है
हम से ही होगी कल की कहानी
लिखेंगे हम देखेगी दुनिया सारी

ख्वाबों का घर यहाँ
सपनों का ऊमीद्दों का
दर्शन है दिगदर्शन है
यह सपना है हमारा

बहना पड़े लहरों – सा बहे
उड़ना पड़े पंछी – सा उडे
हमारा है आसमान
सीखा है हमने यहाँ सभी

चलो उठो जागो रुकना नही है
पाने को पूरी दुनिया पड़ी है
कदम हमने रखा पहले यहाँ है
VIPS है सीढ़ी छूना आसमान है

चलो उठो जागो रुकना नही है
पाने को पूरी दुनिया पड़ी है
कदम हमने रखा पहले यहाँ है
VIPS है सीढ़ी छूना आसमान है

“मेरा प्रथम फ़ैसला

सन् वह दो हज़ार सोला था, जब सुनाया पहला फ़ैसला था
तब शांत अदालत का कमरा था, अभियुक्त के माथे पर डर पसरा था ।।
वो सोच में था की क्या हाल होगा, आज़ाद होगा या उसका समय अकाल होगा ।
मेरा मन भी थोड़ा विचलित सा था, क्यूँकि फ़ैसला सुनाना आसान ना था ।।
मेहनत बहुत लगी थी उस निर्णय में, एक मानव जीवन का सवाल जो था ।
घड़ी के काँटों ने रफ़्तार पकड़ी, सामने वो खड़ा था, बंधी थी हाथों में हथकड़ी ।
मेरी नज़र पड़ी उस बैसाखी पर जिसे पकड़े हुए वो खड़ा था, मन में तनाव बढ़ गया होने वाला कुछ कड़ा जो था ।
अभियुक्त वो दोषी करार हुआ, उस कलम से प्रहार हुआ
उसकी आँखो से अश्रु धारा बही, मेरे मन की विचलन और बड़ी ।
दस्तावेज़ तैय्यार हुए, उसे कारागार प्राप्त हुआ
उस उपलब्धि में असंतोष सा था क्या सच में था इंसाफ़ हुआ ।।

मन को फिर समझाया मैंने की मेरा यह कर्तव्य था,
जो निर्णय हुआ था उस दिन वह ही उस अध्याय का गंतव्य था ।।
फिर मन की विचलन कम हुई और फ़ैसले सैकड़ों बार दिए ।
कभी किसी हस्ते चेहरे पर रोष देखा, कुछ निराशा के अवरोध पार किए।।
शपथ ली थी जो संविधान की, उसे सदैव मुझे निभाना होगा
विकट परिस्थितियाँ जितनी भी आएँ, अडिग रह उन्हें हटाना होगा।।
मन में विचलन आज भी होती है, कार्य यह आसान नहीं,
काँटों की सेज है यह, कोई शाही पकवान नहीं।।

ऋषभ कपूर (दिल्ली न्यायिक सेवा)”

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